वेतन पर टीडीएस कैलकुलेटर (TDS on Salary) 2026

अपनी सैलरी स्लिप से मासिक टीडीएस कटौती और पुरानी बनाम नई कर व्यवस्था के तहत शुद्ध मासिक बैंक क्रेडिट की गणना करें।

त्वरित वेतन चयन:
₹
₹0₹3.00 करोड़
मानक कटौती (Standard Deduction): ₹75,000
स्वतः लागू
मासिक सैलरी टीडीएस (नई कर व्यवस्था)धारा 192
सैलरी से मासिक टीडीएस कटौती
₹8,125/ माह

₹97,500 की वार्षिक कर देयता के आधार पर नियोक्ता हर महीने यह राशि काटता है।

मासिक शुद्ध बैंक क्रेडिट (In-Hand)
₹1.17 लाख/ माह
कुल वार्षिक आयकर देयता₹97,500
शुद्ध कर योग्य आय₹14.25 लाख
मानक कटौती (Standard Deduction)₹75,000
वार्षिक सकल सीटीसी₹15.00 लाख

फॉर्म 16 में कुल वार्षिक वेतन, कटौतियां और नियोक्ता के टैन के तहत जमा किया गया टीडीएस दर्ज होगा।

कर गणना विवरण (Tax Calculation Bridge)

वार्षिक सीटीसी / वेतन आय:₹15.00 लाख
मानक कटौती (Standard Deduction):−₹75,000
शुद्ध कर योग्य आय:₹14.25 लाख
कुल वार्षिक आयकर देयता:₹97,500
सैलरी से मासिक टीडीएस कटौती:₹8,125

मासिक वेतन भुगतान का बंटवारा

मासिक इन-हैंड बैंक क्रेडिट₹1.17 लाख
मासिक टीडीएस कटौती₹8,125

सैलरी पर टीडीएस सूत्र एवं लाइव गणना

मानक सूत्र
मासिक टीडीएस = कुल अनुमानित वार्षिक टैक्स / 12
लाइव गणना (आपके मान डालकर)
वार्षिक वेतन / सीटीसी (CTC):₹15.00 लाख
कर व्यवस्था (R):नई कर व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट)
मानक कटौती (SD):₹75,000
शुद्ध कर योग्य आय (TI):₹14.25 लाख
कुल वार्षिक कर देयता (AT):₹97,500
मान रखने के बाद सूत्र:
मासिक टीडीएस = ₹97,500 / 12 = ₹8,125
मासिक शुद्ध बैंक क्रेडिट (In-Hand):₹1.17 लाख

आयकर अधिनियम की धारा 192 के तहत, नियोक्ताओं को आपकी घोषित कर व्यवस्था और कटौतियों के आधार पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में वार्षिक कर देयता का अनुमान लगाना होता है और समान मासिक किस्तों (कुल वार्षिक कर / 12) में टीडीएस काटना होता है।

सैलरी टीडीएस अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धारा 192 के तहत वेतन पर टीडीएस की गणना कैसे की जाती है?
धारा 192 के तहत, कंपनी पूरे वित्तीय वर्ष के लिए आपके सकल वेतन का अनुमान लगाती है, लागू कटौतियों को घटाती है, सक्रिय स्लैब दरों के अनुसार आयकर की गणना करती है और मासिक टीडीएस निकालने के लिए कुल वार्षिक कर को 12 से विभाजित करती है।
कंपनी वेतन से टीडीएस काटना कब शुरू करती है?
जैसे ही आपके वर्ष भर के अनुमानित कर की राशि शून्य से ऊपर जाती है, नियोक्ता टीडीएस काटना शुरू कर देता है। नई व्यवस्था में ₹12,75,000 तक के वेतन पर कोई कर नहीं बनता — ₹75,000 की मानक कटौती के बाद ₹12,00,000 कर योग्य आय — क्योंकि धारा 87A की ₹60,000 की छूट पूरा कर समाप्त कर देती है। पुरानी व्यवस्था में यह सीमा ₹5,00,000 कर योग्य आय है, जहाँ छूट ₹12,500 है। इससे एक रुपया भी ऊपर होने पर टीडीएस शुरू हो जाता है, जो वर्ष के बचे महीनों में बाँट दिया जाता है।
फॉर्म 16 क्या है और यह वेतन पर टीडीएस से कैसे संबंधित है?
फॉर्म 16 वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद 15 जून तक कंपनियों द्वारा जारी किया जाने वाला एक वार्षिक टीडीएस प्रमाणपत्र है। यह भुगतान किए गए कुल वेतन, दावा की गई कर कटौतियों और आयकर विभाग में जमा किए गए कुल टीडीएस का विवरण देता है।
क्या वेतन पर काटे गए अतिरिक्त टीडीएस का रिफंड मिल सकता है?
हाँ! यदि अतिरिक्त टीडीएस कट गया है (उदाहरण के लिए निवेश प्रमाण देर से जमा करने पर), तो आप आईटी पोर्टल पर अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करके ब्याज सहित पूरा रिफंड पा सकते हैं।
यदि मैं कंपनी को सूचित न करूँ तो टीडीएस के लिए कौन सी कर व्यवस्था चुनी जाती है?
वित्तीय वर्ष 2023-24 से धारा 115BAC के तहत नई कर व्यवस्था डिफ़ॉल्ट व्यवस्था है। यदि आप अपनी पसंद नहीं बताते हैं, तो नई कर व्यवस्था के स्लैब के अनुसार टीडीएस काटा जाएगा।
अपनी दूसरी आय और टीडीएस की जानकारी कंपनी को कैसे दें?
इसके लिए फॉर्म 12BAA है, जो नियम 26B के तहत अक्टूबर 2024 में अधिसूचित हुआ। इससे वेतनभोगी कर्मचारी दूसरी आय पर पहले ही कट चुके टीडीएस और टीसीएस की जानकारी दे सकता है — बैंक ब्याज, लाभांश, कार की खरीद या विदेशी प्रेषण — ताकि कंपनी धारा 192(2B) के तहत वेतन का टीडीएस घटा सके और आपको रिफंड का इंतजार न करना पड़े। दूसरी आय भी इसी तरह बताई जाती है और उससे टीडीएस बढ़ेगा। कंपनी केवल गृह संपत्ति की हानि को वेतन से समायोजित कर सकती है।
कंपनी ने टीडीएस काटा पर वह फॉर्म 26AS में दिख ही नहीं रहा।
धारा 199 के तहत क्रेडिट उसी आधार पर मिलता है जो कटौतीकर्ता अपनी तिमाही टीडीएस विवरणी में बताता है, इसलिए जो कटौती जमा ही नहीं हुई या गलत पैन पर दाखिल हुई वह फॉर्म 26AS या एआईएस में नहीं दिखेगी। कंपनी से टीडीएस विवरणी दाखिल या सुधारने को कहें, और कटौती के प्रमाण के रूप में वेतन पर्चियाँ तथा फॉर्म 16 सँभालें। धारा 205 विभाग को वही कर दोबारा आपसे वसूलने से रोकती है, पर रिटर्न 26AS के आधार पर ही प्रोसेस होता है, इसलिए दाखिल करने से पहले विवरणी ठीक करा लें।

आधिकारिक स्रोत एवं वैधानिक संदर्भ

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