स्टार्टअप बर्न रेट एवं कैश रनवे कैलकुलेटर 2026
भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ग्रॉस बर्न, नेट बर्न और कैश खत्म होने से पहले के रनवे (महीनों में) की गणना करें
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कुल वित्तीय कैश रनवे
10 महीने
वर्तमान नेट बर्न दर पर, बैंक बैलेंस ~10 महीनों में समाप्त हो जाएगा।
कुल मासिक ग्रॉस बर्न₹7.00 लाख
शुद्ध मासिक नेट बर्न₹5.00 लाख
रनवे सूत्र, आपके आंकड़ों के साथ
मानक सूत्र
शुद्ध बर्न = परिचालन व्यय - राजस्व रनवे = नकद शेष / शुद्ध बर्न
लाइव गणना (आपके मान डालकर)
बैंक में नकद (Cash):₹50.00 लाख
मासिक परिचालन व्यय (OpEx):₹7.00 लाख
मासिक राजस्व (Rev):₹2.00 लाख
शुद्ध मासिक बर्न (Burn):₹5.00 लाख
मान रखने के बाद सूत्र:
₹50.00 लाख / ₹5.00 लाख = 10 महीने
रनवे के महीने:10
रनवे बताता है कि राजस्व और खर्च स्थिर रहने पर नकद कितने समय चलेगा। यह मानता है कि दोनों नहीं बढ़ेंगे, इसलिए इसे पूर्वानुमान नहीं, न्यूनतम सीमा मानें। जब राजस्व खर्च ढक ले तो बर्न शून्य हो जाता है और रनवे असीमित।
आधिकारिक स्रोत
स्टार्टअप बर्न रेट व रनवे - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रॉस बर्न रेट और नेट बर्न रेट में क्या अंतर है?
ग्रॉस बर्न रेट (Gross Burn) आपके स्टार्टअप का कुल मासिक नकद खर्च (वेतन, सर्वर/एडब्ल्यूएस लागत, किराया, मार्केटिंग) है। नेट बर्न रेट (Net Burn) = ग्रॉस खर्च − मासिक आय। यह वह शुद्ध नकद घाटा है जो आपका बैंक बैलेंस हर महीने घटाता है।
स्टार्टअप का कैश रनवे (Runway) कैसे मापा जाता है?
रनवे (महीनों में) = बैंक में नकदी ÷ मासिक नेट बर्न। बैंक में ₹2,00,00,000 और ₹12,00,000 मासिक नेट बर्न हो तो लगभग 16 महीने का रनवे है। भारतीय संस्थापकों के लिए दो सावधानियाँ: राजस्व घटाकर नेट बर्न लें, ग्रॉस नहीं, वरना आँकड़ा बेहतर दिखेगा; और याद रखें कि फंडरेज़िंग में छह महीने या अधिक लगते हैं, इसलिए नौ से बारह महीने बचे होने पर ही शुरुआत कर दें, घबराने का इंतज़ार न करें।
भारतीय स्टार्टअप को अपने बर्न में कौन-सी वैधानिक देनदारियाँ जोड़नी चाहिए?
चार देनदारियाँ तय तारीखों पर बैंक से निकलती हैं और अक्सर मासिक बर्न में गिनी नहीं जातीं। अग्रिम कर चार किश्तों में — 15 जून तक 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75%, 15 मार्च तक 100%। देय जीएसटी, GSTR-3B के साथ 20 तारीख तक। वेतन और विक्रेता भुगतान पर काटा गया टीडीएस, अगले महीने की 7 तारीख तक जमा। पीएफ और ईएसआई 15 तारीख तक। 30 लोगों की टीम में 3 लाख रुपये मासिक पीएफ और 5 लाख रुपये टीडीएस का अर्थ है 8 लाख रुपये का बर्न, जो किसी पेरोल लाइन में नहीं दिखता।
भारतीय स्टार्टअप को अगला फंडिंग राउंड कब शुरू करना चाहिए?
जब 9 से 12 महीने का रनवे बचा हो, क्योंकि भारत में सीड या सीरीज़ ए राउंड में पहली मुलाक़ात से पैसा बैंक में आने तक व्यावहारिक रूप से 6 महीने लगते हैं — निवेशकों से बातचीत में 6 से 8 हफ़्ते, ड्यू डिलिजेंस में 4 से 6 हफ़्ते, फिर टर्म शीट, निश्चयात्मक अनुबंध, और कैप टेबल पर विदेशी निवेशक होने पर फेमा या एफडीआई फाइलिंग। 4 महीने का रनवे बचने पर शुरू करने का अर्थ है कमज़ोरी से मोलभाव, जिसकी कीमत आमतौर पर 10 से 15 प्रतिशत अंक अतिरिक्त डाइल्यूशन होती है।
जीएसटी रिफंड और टीडीएस क्रेडिट भारतीय स्टार्टअप के बर्न को कैसे बिगाड़ते हैं?
पैसा बैंक से महीनों पहले निकल जाता है और बहुत बाद में लौटता है। विदेश में बिल भेजने वाली निर्यातक या सास कंपनी भारतीय इनपुट पर जीएसटी चुकाती है और RFD-01 रिफंड दाखिल करती है, जिसमें 60 से 90 दिन लगते हैं, डेफिशिएंसी मेमो आने पर और भी अधिक। ग्राहक धारा 194J के तहत पेशेवर शुल्क पर 10% टीडीएस काटते हैं, जो रिटर्न भरने पर ही वापस मिलता है। महीने के 10 लाख रुपये के बिल का अर्थ हो सकता है 1 लाख रुपये टीडीएस में फँसे और लाखों रुपये बिना रिफंड वाले आईटीसी में — असली नकदी, जो किसी खर्च लाइन में दर्ज नहीं होती।
बूटस्ट्रैप्ड भारतीय स्टार्टअप के लिए व्यावहारिक रनवे लक्ष्य क्या है?
निवेशक-समर्थित कंपनियाँ 18 से 24 महीने की योजना बनाती हैं क्योंकि उन्हें दोबारा फंड जुटाना है। बूटस्ट्रैप्ड या राजस्व से चलने वाली कंपनी के पास कम से कम 6 महीने की स्थिर लागत — वेतन, किराया, वैधानिक देनदारियाँ — नकद में होनी चाहिए, और बेहतर हो तो 12 महीने की। मायने रखने वाला आँकड़ा कुल खर्च के महीने नहीं, बल्कि स्थिर लागत के कितने महीने कवर हैं यह है: मार्केटिंग और भर्ती एक हफ़्ते में रोकी जा सकती है, पर वेतन, पीएफ और पंजीकृत कार्यालय का पट्टा नहीं।
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