
📜 दीपावली की सुनहरी सुबह मैसूर की गलियां गेंदे के फूलों, रंगोलियों और चमकती लालटेनों से दुल्हन की तरह सजी थीं।
अज्जी से मिले ₹100 के शुरुआती निवेश से देव और काव्या ने 50 सुनहरे दीये सजाए। काव्या ने नुकसान से बचाकर सही कीमत तय की और ₹230 का शुद्ध मुनाफा कमाया!

📜 दीपावली की सुनहरी सुबह मैसूर की गलियां गेंदे के फूलों, रंगोलियों और चमकती लालटेनों से दुल्हन की तरह सजी थीं।

📜 बरामदे में बैठकर काव्या और देव चिंटू के साथ मिलकर दिवाली पर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे थे।

📜 अज्जी ने दोनों बच्चों को ₹100 का कड़क नोट थमाकर आशीर्वाद दिया।
"यह रहे तुम्हारे त्योहार के बिजनेस के लिए ₹100 का शुरुआती निवेश! लेकिन व्यापार का सुनहरा नियम याद रखना: एक-एक रुपये का हिसाब रखना होगा!"

📜 बच्चों ने पूरे जोश और जिम्मेदारी के साथ पूंजी संभाली।
"हम वादा करते हैं अज्जी! हम सारे खर्च का हिसाब रखेंगे, सुंदर सामान बनाएंगे और ईमानदारी से मुनाफा कमाएंगे!"

📜 बच्चे देवराज मार्केट में सोमन्ना की दुकान पहुंचे जहां मिट्टी के ताजे पके दीये धूप में रखे थे।

📜 सोमन्ना ने 50 दीये टोकने में पैक करके बच्चों को दिए।
"हमारे नन्हे व्यापारियों के लिए मैं थोक भाव पर मिट्टी के दीये दूंगा: ₹2 का एक! तुम्हारे ₹100 में पूरे 50 दीये!"

📜 काव्या ने रंग की दुकान से सुनहरे ऐक्रेलिक पेंट, चमकीला ग्लिटर और बारीक ब्रश ₹50 में खरीदे।

📜 काव्या ने ₹20 में सुंदर गिफ्ट बॉक्स खरीदे ताकि 5-5 दीयों के सेट बनाकर बेचे जा सकें।

📜 अज्जी का बरामदा एक सुंदर क्राफ्ट स्टूडियो बन गया, चारों तरफ रंग और सूखते दीये सज गए।

📜 काव्या ने डायरी में प्रति दीया लागत (Unit Cost) का पक्का हिसाब निकाला।

"हमारा लागत हिसाब देखो: 50 दीये = ₹100 + रंग/ग्लिटर = ₹50 + डिब्बे = ₹20 $\rightarrow$ कुल लागत = ₹170! यानी एक तैयार दीया हमें ₹3.40 का पड़ा!"

📜 देव ने पूरे ध्यान से दीयों पर सुनहरे और लाल रंगों से मोरपंख के सुंदर डिजाइन बनाए।

📜 काव्या ने किनारों पर छोटे-छोटे शीशे और सितारे चिपकाए, जिससे दीये जगमगा उठे।

📜 चिंटू अपनी नाक पर सुनहरे रंग का टीका लगाए पहरेदार की तरह पास बैठा रहा।

📜 सभी 50 सुनहरे दीये धूप में चमक रहे थे—कला और मेहनत का शानदार नमूना!

📜 देव ने बिना सोचे झटपट बेचने के लिए कम दाम रखने का सुझाव दिया।

"हम इन्हें ₹3 का एक बेचते हैं! लोग 10 मिनट में सारे दीये खरीद लेंगे!"
फिन-जूनियर (FinJunior) के इन इंटरैक्टिव खेलों और कहानियों को Zerodha की Rupee Tales और Varsity Junior पहल से प्रेरित होकर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के हर बच्चे तक व्यावहारिक वित्तीय समझ पहुँचाना है।