मैसूर का दिवाली दीया स्टॉल: लाभ, हानि और व्यापार की कला

अंक 1 व 2 • पैनल 1-15

अध्याय 07 • मैसूर

मैसूर का दिवाली दीया स्टॉल: लाभ, हानि और व्यापार की कला

अज्जी के ₹100 के शुरुआती निवेश और सोमन्ना के 50 दीयों से, जिनका पैसा बिक्री के बाद चुकाना है, देव और काव्या सुनहरे दीये सजाते हैं। काव्या नुकसान से बचाकर सही कीमत तय करती है और ₹230 का शुद्ध मुनाफा कमाती है!

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पैनल 1

📜 दीपावली की सुनहरी सुबह मैसूर की गलियां गेंदे के फूलों, रंगोलियों और चमकती लालटेनों से दुल्हन की तरह सजी थीं।

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पैनल 2

📜 बरामदे में बैठकर काव्या और देव चिंटू के साथ मिलकर दिवाली पर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे थे।

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पैनल 3

📜 अज्जी ने दोनों बच्चों को ₹100 का कड़क नोट थमाकर आशीर्वाद दिया।

बोलने वाला किरदार
अज्जी (कल्याणी अम्मा)

"यह रहे तुम्हारे त्योहार के बिजनेस के लिए ₹100 का शुरुआती निवेश! लेकिन व्यापार का सुनहरा नियम याद रखना: एक-एक रुपये का हिसाब रखना होगा!"

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पैनल 4

📜 बच्चों ने पूरे जोश और जिम्मेदारी के साथ पूंजी संभाली।

बोलने वाला किरदार
काव्या और देव

"हम वादा करते हैं अज्जी! हम सारे खर्च का हिसाब रखेंगे, सुंदर सामान बनाएंगे और ईमानदारी से मुनाफा कमाएंगे!"

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पैनल 5

📜 बच्चे देवराज मार्केट में सोमन्ना की दुकान पहुंचे जहां मिट्टी के ताजे पके दीये धूप में रखे थे।

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पैनल 6

📜 सोमन्ना ने 50 दीये बेंत की टोकरी में पैक करके बच्चों को दिए।

बोलने वाला किरदार
सोमन्ना

"हमारे नन्हे व्यापारियों के लिए मैं थोक भाव पर मिट्टी के दीये दूंगा: ₹2 का एक, यानी 50 दीये ₹100 में! अज्जी के ₹100 रंग और डिब्बों के लिए रखो, और मेरा पैसा स्टॉल के बाद दे देना। मुझे तुम पर भरोसा है!"

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पैनल 7

📜 काव्या ने रंग की दुकान से सुनहरे ऐक्रेलिक पेंट, चमकीला ग्लिटर और बारीक ब्रश ₹50 में खरीदे।

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पैनल 8

📜 काव्या ने ₹20 में सुंदर गिफ्ट बॉक्स खरीदे ताकि 5-5 दीयों के सेट बनाकर बेचे जा सकें।

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पैनल 9

📜 अज्जी का बरामदा एक सुंदर क्राफ्ट स्टूडियो बन गया, चारों तरफ रंग और सूखते दीये सज गए।

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पैनल 10

📜 काव्या ने डायरी में प्रति दीया लागत (Unit Cost) का पक्का हिसाब निकाला।

बोलने वाला किरदार
काव्या

"हमारा लागत हिसाब देखो: 50 दीये = ₹100 (सोमन्ना अंकल को देने हैं) + रंग/ग्लिटर = ₹50 + डिब्बे = ₹20 → कुल लागत = ₹170! यानी एक तैयार दीया हमें ₹3.40 का पड़ा!"

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पैनल 11

📜 देव ने पूरे ध्यान से दीयों पर सुनहरे और लाल रंगों से मोरपंख के सुंदर डिजाइन बनाए।

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पैनल 12

📜 काव्या ने किनारों पर छोटे-छोटे शीशे और सितारे चिपकाए, जिससे दीये जगमगा उठे।

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पैनल 13

📜 चिंटू अपनी नाक पर सुनहरे रंग का टीका लगाए पहरेदार की तरह पास बैठा रहा।

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पैनल 14

📜 सभी 50 सुनहरे दीये धूप में चमक रहे थे—कला और मेहनत का शानदार नमूना!

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पैनल 15

📜 देव ने बिना सोचे झटपट बेचने के लिए कम दाम रखने का सुझाव दिया।

बोलने वाला किरदार
देव

"हम इन्हें ₹3 का एक बेचते हैं! लोग 10 मिनट में सारे दीये खरीद लेंगे!"

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प्रेरणा और आभार (Inspiration & Attribution)

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