मैसूर दशहरा का रहस्य: बचत और गुल्लक की असली शक्ति

अंक 1 व 2 • पैनल 1-14

अध्याय 01 • मैसूर

मैसूर दशहरा का रहस्य: बचत और गुल्लक की असली शक्ति

मैसूर के हेरिटेज शहर में देव अपने सारे पैसे मिठाई पर उड़ा देता है, जबकि काव्या लाल गुल्लक में बचत करती है। जब परीक्षा का आर्ट बॉक्स नहर में गिर जाता है, तो क्या होता है?

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पैनल 1

📜 मैसूर में चामुंडी पहाड़ी पर सुनहरी सुबह की किरणें खिलती हैं। हवा में चमेली के फूलों और फिल्टर कॉफी की खुशबू महक रही है।

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पैनल 2

📜 आंगन के बरामदे में अज्जी दशहरे के लिए पीतल के पारंपरिक दीये चमका रही थीं।

बोलने वाला किरदार
अज्जी (कल्याणी अम्मा)

"शुभ प्रभात काव्या और देव! दशहरा त्योहार में सिर्फ दो हफ्ते बचे हैं। आज त्योहार का खर्चा कौन कमाना चाहता है?"

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पैनल 3

📜 देव खुशी से उछल पड़ा, जबकि 10 वर्षीय काव्या ने शांत होकर पूरी बात समझी।

बोलने वाला किरदार
अज्जी (कल्याणी अम्मा)

"सुबह के 3 जरूरी काम हैं। हर काम पूरा करने पर मैं तुम्हें ₹10 के चमचमाते सिक्के दूंगी!"

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पैनल 4

📜 काव्या ने गेंदे के ताजे फूलों की टोकरियां पूजा घर में संभाल कर रखीं।

बोलने वाला किरदार
काव्या

"पहला काम पूरा, अज्जी! पूजा के लिए देवराजा मार्केट से ताजे गेंदे के फूल आ गए!"

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पैनल 5

📜 देव ने झाड़ू से आंगन की एक-एक पत्ती साफ कर सीढ़ियां चमका दीं।

बोलने वाला किरदार
देव

"देखिए अज्जी! पूरा पत्थर का आंगन चमक गया! यह रहा दूसरा काम पूरा!"

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पैनल 6

📜 तीसरे काम के लिए दोनों बच्चों ने मंदिर के पुजारी जी को दूध का पीतल का डिब्बा पहुंचाया।

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पैनल 7

📜 अज्जी ने दोनों की हथेलियों पर ₹30-₹30 के चमचमाते सिक्के रखे। देव के दिमाग में मिठाइयों के सपने तैरने लगे!

बोलने वाला किरदार
अज्जी (कल्याणी अम्मा)

"शाबाश बच्चों! यह रहे देव के ₹30, और काव्या के ₹30। इसे समझदारी से इस्तेमाल करना!"

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पैनल 8

📜 बच्चे देवराजा मार्केट पहुंचे, जहां गरमा-गरम मिठाइयों, चंदन की खुशबू और लकड़ी के खिलौनों की दुकानें सजी थीं।

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पैनल 9

📜 3 मिनट के अंदर देव ने अपनी सारी कमाई तुरंत खाने-पीने और खिलौने पर उड़ा दी।

बोलने वाला किरदार
देव

"अंकल! मुझे दो मैसूर पाक (₹15), एक लट्टू (₹10) और बादाम दूध (₹5) दीजिए! यह लीजिए मेरे पूरे ₹30!"

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पैनल 10

📜 देव ने हाथ पोंछे। अब उसकी जेब में बचे थे: ठीक ₹0।

बोलने वाला किरदार
देव

"आहा! मजा आ गया! जेब भले खाली हो गई, लेकिन पेट भर गया!"

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पैनल 11

📜 काव्या ने समझदारी दिखाई। उसने ₹25 अपनी मुट्ठी में सुरक्षित रखे।

बोलने वाला किरदार
काव्या

"अगर मैंने सारे ₹30 अभी खा लिए, तो स्वाद 5 मिनट रहेगा पर पैसे हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। मैं ₹5 का मीठा लूंगी और बाकी बचाऊंगी।"

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पैनल 12

📜 कुम्हार सोमन्ना लाल मिट्टी के सुंदर गुल्लक पर पीले रंगों की नक्काशी कर रहे थे।

बोलने वाला किरदार
सोमन्ना (कुम्हार)

"नमस्कार नन्हीं काव्या! यह हाथ से रंगे लाल मिट्टी के गुल्लक देखो। सिर्फ ₹5 का एक!"

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पैनल 13

📜 काव्या ने ₹5 में लाल गुल्लक खरीदा और बाकी बचे ₹20 के सिक्के एक-एक करके उसमें खनखनाते हुए डाल दिए। *खन! खन!*

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पैनल 14

📜 रास्ते भर देव चिढ़ाता रहा, लेकिन काव्या मुस्कुराती हुई गुल्लक को सीने से लगाए रही।

बोलने वाला किरदार
देव

"हाहा काव्या! तुमने मिट्टी के डिब्बे में पैसे बंद कर दिए! न इसे खा सकती हो, न खेल सकती हो!"

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प्रेरणा और आभार (Inspiration & Attribution)

फिन-जूनियर (FinJunior) के इन इंटरैक्टिव खेलों और कहानियों को ज़ेरोधा की रुपी टेल्स और वर्सिटी जूनियर पहल से प्रेरित होकर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के हर बच्चे तक व्यावहारिक वित्तीय समझ पहुँचाना है।

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