
📜 मैसूर के कुक्करहल्ली लेक के स्केटिंग ट्रैक पर एक सुहावनी मंगलवार की दोपहर (वर्ष 2025)। सुनहरे दक्कन के आसमान तले चामुंडी पहाड़ी की भव्य आकृति चमक रही है और नीम के पेड़ कंक्रीट के चिकने ट्रैक पर शीतल छाया बिखेर रहे हैं।
कुक्करहल्ली लेक पर रोहन 'सिर्फ ₹10 प्रति सप्ताह' की किस्त पर उधार लिए गए ₹100 के नए स्केट्स पर हवा से बातें कर रहा है। जब बीमारी में किस्त छूटने पर पेनल्टी और जब्ती की धमकी मिलती है, तो अज्जी और काव्या ब्याज के गणितीय जाल और अच्छे बनाम बुरे कर्ज का रहस्य समझाते हैं।

📜 मैसूर के कुक्करहल्ली लेक के स्केटिंग ट्रैक पर एक सुहावनी मंगलवार की दोपहर (वर्ष 2025)। सुनहरे दक्कन के आसमान तले चामुंडी पहाड़ी की भव्य आकृति चमक रही है और नीम के पेड़ कंक्रीट के चिकने ट्रैक पर शीतल छाया बिखेर रहे हैं।

📜 देव पत्थर की बेंच पर बैठा भुनी मूंगफली खा रहा था और स्केटिंग करते बच्चों को देखकर रोमांच से उछल रहा था।
"देखो काव्या, वे कैसे उड़ रहे हैं! अगर मेरे पास भी प्रो-स्पीड स्केट्स होते, तो मैं शताब्दी एक्सप्रेस से भी तेज इस झील के चक्कर लगाता! मेरे पैर जमीन पर ही नहीं पड़ते!"

📜 सूंऽऽऽऽ! ट्रैक पर अचानक नारंगी और लाल रंग का एक बिजली जैसा झोंका गुजरा! उनका सहपाठी रोहन चमचमाते नए लाल स्पीड स्केट्स पहने हवा से बातें कर रहा था, जिसके पहियों में लगी नीली-लाल एलईडी लाइटें चमक रही थीं!

📜 रोहन ने हवा में 360 डिग्री का गोल चक्कर काटा और देव तथा काव्या के ठीक सामने स्टाइल से ब्रेक लगाकर धूल उड़ा दी।
"टा-डा! मिलिए थंडर-ब्लेड 8000 से! 80 एमएम के पहिए, कार्बन बेयरिंग और रात में चमकती नियॉन लाइटें! कैसी लगी मेरी रफ्तार?"

📜 देव घुटनों के बल बैठ गया और विस्मय से खुली आंखों के साथ चमकते पहियों और क्रोम एक्सल को निहारने लगा।
"रोहन! ये तो देवराजा मार्केट की चैंपियन स्पोर्ट्स वाले असली रेसिंग स्केट्स हैं! इनकी कीमत पूरे ₹100 है! तुम्हें ये कैसे मिले जब हमारी हफ्ते की पॉकेट मनी सिर्फ ₹15 है?"

📜 रोहन ने सीना फुलाकर इतराते हुए अपने नए चमकीले स्केट्स पर हाथ फेरा और खुद को सबसे तेज चालाक साबित करने लगा।
"हाहा! क्योंकि मैं होशियार हूं! केवल सुस्त कछुए मिट्टी के गुल्लक में एक-एक सिक्का जोड़कर 7-8 हफ्तों तक इंतजार करते हैं! मुझे आज ही रफ्तार चाहिए थी, तो मैंने आज ही खरीद ली!"

📜 देव की उत्सुकता सातवें आसमान पर पहुंच गई और वह जादुई खजाने की कहानियां सोचने लगा।
"रुको... बिना बचत किए तुम्हारे पास तुरंत ₹100 नकद कहां से आए? क्या तुम्हें चामुंडी मंदिर के पीछे कोई गड़ा हुआ खजाना मिल गया?!"

📜 रोहन खिलखिला उठा, उसे पूरा यकीन था कि उसने बिना मेहनत किए तुरंत चीजें पाने का जादुई नुस्खा ढूंढ लिया है।
"अरे नहीं बुद्धू! मैंने बड़े लड़कों के क्लब वाले विक्रम भैया से ₹100 उधार लिए हैं! उन्होंने तुरंत ₹100 का कड़क नोट दे दिया, और मुझे बस हर रविवार को ₹10 का छोटा सा सिक्का देना है। बिल्कुल आसान!"

📜 काव्या ने अपनी आंखें सिकोड़ीं। उसे समझ आ गया कि इस आसान दिखने वाले ₹10 के सिक्के के पीछे कोई गहरा पेंच है।
"जरा एक मिनट रुको, रोहन... विक्रम कोई समाजसेवी तो नहीं है। तुम्हें हर रविवार ₹10 आखिर कितने हफ्तों तक चुकाने हैं?"

📜 रोहन ने अपनी जेब से मुड़ी-तुड़ी पीली पर्ची निकाली जिस पर विक्रम के हस्ताक्षर और तारीखें लिखी थीं।
"अरे... पर्ची देखकर बताता हूं। विक्रम भैया ने इस पीली पर्ची पर लिखा था... देखो, यहां लिखा है: '16 लगातार रविवार तक ₹10 की साप्ताहिक किस्त'।"

📜 काव्या बेंच पर जम कर बैठ गई और अपनी गणित की कॉपी खोलकर बड़े-बड़े अक्षरों में हिसाब लगाने लगी।
"देव, मुझे तुरंत अपनी पेंसिल दो! अब जरा मैसूर का असली गणित लगाते हैं। देखते हैं इस 'आसान' शॉर्टकट की असली कीमत क्या है!"

📜 काव्या ने कॉपी आगे कर दी, जिस पर '16 × 10 = ₹160' का लाल घेरा किसी खतरे के सायरन की तरह चमक रहा था।
"ये आंकड़े देखो रोहन! 16 रविवार × ₹10 = ₹160! तुमने स्केट्स के लिए ₹100 उधार लिए थे, लेकिन विक्रम की जेब में पूरे ₹160 जाएंगे!"

📜 देव के हाथ से मूंगफली छूटकर घास में गिर गई और चिंटू हैरानी से उसकी तरफ देखने लगा।
"हे भगवान! ₹60 ज्यादा?! साठ रुपये सीधे नाली में बह गए! तुम स्केट्स की असली कीमत से डेढ़ गुना से भी ज्यादा रकम चुका रहे हो!"

📜 काव्या ने पाई-चार्ट बनाकर समझाया कि कैसे ₹100 के खिलौने पर ₹60 का ब्याज किसी भारी बोझ की तरह सिर पर लद जाता है।
"यह अतिरिक्त ₹60 कहलाता है 'ब्याज' (Interest) — जो बिना कमाए पहले खर्च करने पर चुकाई जाने वाली भारी कीमत है। यह जल्दबाजी पर लगा 60% का जुर्माना है!"

📜 काव्या ने 16 हफ्तों का टाइमलाइन चार्ट दिखाया, जिससे साफ था कि रोहन के पास जरूरी चीजों के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं बचेगी।
"अपनी जेब खर्च का हिसाब तो लगाओ, रोहन! तुम्हें हफ्ते में ₹15 मिलते हैं। अगर हर रविवार ₹10 विक्रम को चले गए, तो तुम्हारे पास पूरे हफ्ते के लिए सिर्फ ₹5 बचेंगे! 4 महीने तक तुम विक्रम के लिए बंधुआ मजदूरी करोगे!"
फिन-जूनियर (FinJunior) के इन इंटरैक्टिव खेलों और कहानियों को Zerodha की Rupee Tales और Varsity Junior पहल से प्रेरित होकर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के हर बच्चे तक व्यावहारिक वित्तीय समझ पहुँचाना है।